- शंभू-खनौरी और सिंघू बॉर्डर सील; कई किसान हिरासत में
- एक दिन पहले गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी हिरासत में
- शंभू और खनौरी बॉर्डर पर भारी सुरक्षा, धारा 163 लागू
चंडीगढ़/नई दिल्ली, 21 जुलाई 2026
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों के किसानों ने मंगलवार को दिल्ली कूच का ऐलान किया। किसान संगठनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में किसान दिल्ली स्थित किसान घाट में प्रस्तावित महापंचायत में शामिल होने के लिए रवाना हुए, लेकिन हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने उन्हें विभिन्न सीमाओं पर रोक दिया। शंभू, खनौरी और सिंघू बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया गया है, जबकि कई स्थानों पर किसानों को हिरासत में लिया गया।
सरवन सिंह पंढेर के नेतृत्व में ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले किसानों ने भारत
-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए शंभू बॉर्डर पर देर रात से ही कंक्रीट बैरिकेड्स, बड़े-बड़े स्लैब और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। इलाके में धारा 163 लागू कर दी गई है।
इसके अलावा खनौरी बॉर्डर पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे पर भी ट्रक और ट्राले खड़े कर आवाजाही रोक दी गई, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।
दिल्ली-हरियाणा को जोड़ने वाले सिंघू बॉर्डर पर भी हरियाणा पुलिस ने बैरिकेडिंग कर सभी वाहनों की जांच शुरू कर दी। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी है। बॉर्डर सील होने से दिल्ली, सोनीपत और आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ।
कुरुक्षेत्र जिले में ज्योतिसर चौकी के पास किसानों से भरी निजी बसों को पुलिस ने रोक लिया। बसों में सवार किसानों को नीचे उतारकर हिरासत में लिया गया और उन्हें पुलिस लाइन ले जाया गया। पूरे जिले में पुलिस किसानों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
भाकियू पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने बताया कि 30 जून को चंडीगढ़ में ‘देश बचाओ मोर्चा’ का गठन किया गया था। उसी बैठक में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध और कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत दिल्ली में आंदोलन का फैसला लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए लगातार किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले रही है।
दिल्ली कूच से पहले रविवार को भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी और संगठन के प्रवक्ता राकेश बैंस को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। उनकी रिहाई की मांग को लेकर किसानों ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किया था। मंगलवार को भी हरियाणा के कई जिलों में किसान नेताओं को रोकने और हिरासत में लेने की कार्रवाई जारी रही।
देशभर के किसान संगठनों ने दिल्ली के किसान घाट में भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में महापंचायत का आह्वान किया है। पंजाब से हजारों किसान अलग-अलग काफिलों में दिल्ली की ओर रवाना हुए। किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि किसान रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर रुकते हुए दिल्ली पहुंचने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते का सबसे अधिक असर कृषि, डेयरी, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र पर पड़ेगा। उनका आरोप है कि इस समझौते पर किसानों और कृषि संगठनों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया।
किसान नेताओं का कहना है कि अमेरिका लंबे समय से भारत के कृषि और डेयरी बाजार में अधिक पहुंच की मांग कर रहा है। इसमें विशेष रूप से सोयाबीन, मक्का, कपास, सेब, डेयरी उत्पाद और अन्य कृषि वस्तुएं शामिल हैं। किसानों का दावा है कि यदि यह समझौता वर्तमान स्वरूप में लागू हुआ तो भारतीय किसानों, विशेषकर छोटे और मध्यम किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
करनाल के डीएसपी मनोज कुमार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने किसानों और आम नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि पुलिस पूरी तरह सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
शंभू, खनौरी और सिंघू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग और मार्ग बंद होने के कारण दिल्ली-अमृतसर-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग समेत कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। हजारों यात्रियों और रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने लोगों से यात्रा से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है।
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