- ऑस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर 11.5 लाख की कथित ठगी
- पीड़ित परिवार का आरोप- रकम लेने के बाद न वीजा मिला, न पैसे लौटाए; प्रदर्शन के दौरान कार्यालय बंद कर संचालक के निकल जाने का दावा
जालंधर, 10 अगस्त 2026
विदेश भेजने के नाम पर कथित ठगी का एक मामला सामने आने के बाद जालंधर में एक इमीग्रेशन कार्यालय के बाहर भारतीय किसान यूनियन (कड़ियां) के सदस्यों और पीड़ित परिवार ने प्रदर्शन किया। फाजिल्का निवासी किसान परिवार ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को स्टूडेंट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया भेजने की प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर उनसे करीब 11.50 लाख रुपये विभिन्न मदों में बैंक खातों के माध्यम से लिए गए, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद न तो उनका बेटा विदेश जा सका और न ही रकम वापस की गई।
पीड़ित परिवार के सदस्य दरबार सिंह ने बताया कि वे अपने बेटे को ऑस्ट्रेलिया भेजना चाहते थे। उनके अनुसार परिवार के पास करीब 32 लाख रुपये का बैंक बैलेंस और लोन की व्यवस्था थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इमीग्रेशन फर्म की ओर से फाइल में कमियां बताकर दस्तावेजी और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर उनसे अलग-अलग रकम ली गई और करीब 11.5 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए।
परिवार का कहना है कि उन्हें जल्द वीजा मिलने का भरोसा दिया गया था, लेकिन करीब छह महीने से एक साल का समय बीतने के बाद भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो कथित तौर पर उन्हें अलग-अलग तारीखें देकर टालमटोल की जाती रही।
मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष मनप्रीत सिंह संधू के नेतृत्व में किसान संगठन के सदस्य और पीड़ित परिवार इमीग्रेशन कार्यालय के बाहर पहुंचे। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि परिवार पिछले कई महीनों से कार्यालय के चक्कर लगा रहा है। उनके मुताबिक, बातचीत के बाद एजेंट की ओर से 28 तारीख को मिलने का समय दिया गया था, लेकिन तय समय पर भी कथित तौर पर कोई समाधान नहीं हुआ।
किसान नेताओं ने दावा किया कि सोमवार को जब यूनियन के सदस्य और पीड़ित परिवार तीसरी बार कार्यालय पहुंचे तो संचालक को इसकी जानकारी मिल गई और वह कार्यालय बंद कर वहां से निकल गया। प्रदर्शनकारियों का यह भी दावा है कि उन्हें मिली लाइव लोकेशन के अनुसार संचालक जालंधर में ही मौजूद था, जबकि फोन पर उसके दिल्ली में होने की बात कही जा रही थी। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
किसान यूनियन ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। यूनियन नेताओं का कहना है कि पंजाब के कई परिवार अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए जमीन बेचकर या कर्ज लेकर पैसे जुटाते हैं। ऐसे में यदि कोई एजेंट कथित तौर पर उनकी मेहनत की कमाई लेकर प्रक्रिया पूरी नहीं करता या रकम वापस नहीं करता तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यूनियन के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इमीग्रेशन फर्म संचालक सामने आकर पीड़ित परिवार से बातचीत नहीं करता और कथित तौर पर ली गई करीब 11.50 लाख रुपये की पूरी रकम वापस नहीं की जाती, तो संघर्ष तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति के घर के बाहर भी धरना दिया जाएगा।
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