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Home » India » घर में रखा सोना अब कमाएगा ब्याज! सरकार ला रही नई स्कीम

घर में रखा सोना अब कमाएगा ब्याज! सरकार ला रही नई स्कीम

HNE News DeskBy HNE News DeskAugust 21, 2026
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Picture1 1 - Hindi News Express
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश के घरों में लंबे समय से निष्क्रिय पड़े सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अपनी Gold Monetisation Scheme (GMS) को नए स्वरूप में लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोगों के लिए सोना जमा कराने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में आसान और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय ज्वेलर्स को योजना से जोड़ने का विकल्प महत्वपूर्ण माना जा रहा है।HbwE1yPzdYiC J4zKRvPhWFzMaTtc94AYjHmg80Sne0M1gdXIMWKtC4XdEDNAmXQNiR7adbLW 7ftO k QSRkXh0BdtGEcDMNrG6d ddY gc3N4PCS FTck1n5LMt u8HaczqurAff2iCrGTxvh3QNXNHDU n6d0Prcr WbjRL1M2t39NABKcjmO9bKOyCI5 - Hindi News Express

बैंक जाने की जरूरत कम करने की कोशिश

2015 में शुरू की गई मौजूदा Gold Monetisation Scheme का उद्देश्य लोगों के घरों और संस्थानों में पड़े निष्क्रिय सोने को जमा कराकर उसे आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल करना था। योजना के तहत सोना, सिक्के और आभूषण निर्धारित बैंकों या कलेक्शन सेंटरों के माध्यम से जमा किए जाते थे।

हालांकि, प्रक्रिया जटिल होने और लोगों के अपने आभूषण बैंक या निर्धारित केंद्र पर ले जाने में झिझक के कारण योजना को अपेक्षित लोकप्रियता नहीं मिल सकी। अब सरकार इसमें बदलाव करके आम लोगों के लिए सोना जमा कराने की प्रक्रिया को ज्यादा सुविधाजनक बनाने पर विचार कर रही है।

प्रस्तावित मॉडल में स्थानीय और भरोसेमंद ज्वेलर्स को ग्राहकों और योजना के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बनाया जा सकता है। इससे लोगों को अपने परिचित सुनार के माध्यम से सोना जमा कराने की सुविधा मिल सकती है।

जमा सोने पर मिलेगा ब्याज

नई व्यवस्था में तय नियमों के अनुसार योजना में जमा किए गए सोने के वजन के आधार पर ग्राहकों को ब्याज का लाभ मिल सकता है। इसका उद्देश्य केवल सोने को घरों से बाहर निकालना नहीं, बल्कि लोगों को इसके बदले आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना भी है।

इस व्यवस्था से ऐसे परिवारों को फायदा हो सकता है, जिनके पास पुराने आभूषण या अन्य रूप में सोना मौजूद है, लेकिन वह लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यदि वे इसे योजना के तहत जमा करते हैं तो निष्क्रिय संपत्ति से संभावित आय का स्रोत तैयार हो सकता है।

भारतीय घरों में 20,000-30,000 टन सोना होने का अनुमान

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। विभिन्न अनुमानों के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास 20,000 से 30,000 टन तक सोना मौजूद हो सकता है। इसका बड़ा हिस्सा आभूषणों के रूप में घरों और निजी तिजोरियों में रखा हुआ है।

सरकार का मानना है कि यदि इस विशाल भंडार का एक छोटा हिस्सा भी औपचारिक आर्थिक व्यवस्था में वापस आता है तो इससे देश की सोने के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

भारत अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का इस्तेमाल बढ़ने से गोल्ड इंपोर्ट में कमी और विदेशी मुद्रा पर दबाव घटाने में मदद मिल सकती है।

ज्वेलर्स को प्रोत्साहन देने का सुझाव

योजना को सफल बनाने के लिए ज्वेलर्स की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की ओर से ज्वेलर्स को आर्थिक प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया गया है।

प्रस्ताव के अनुसार रिफाइनर्स के माध्यम से ज्वेलर्स को लगभग 0.75% से 1% तक इंसेंटिव दिया जा सकता है। इससे ज्वेलर्स अपने ग्राहकों को योजना के बारे में जानकारी देने और उन्हें सोना जमा कराने के लिए प्रोत्साहित करने में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।

स्थानीय ज्वेलर्स का नेटवर्क देशभर में व्यापक है और लोगों का उनके साथ लंबे समय से कारोबारी संबंध रहता है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि ज्वेलर्स को योजना का हिस्सा बनाने से आम लोगों का भरोसा बढ़ सकता है।

सरकार के सामने चुनौती भरोसा और पारदर्शिता की

हालांकि योजना को नए स्वरूप में लागू करने से पहले कई महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट करना होगा। इनमें सोने की शुद्धता की जांच, मूल्यांकन, रिफाइनिंग, जमा किए गए सोने की सुरक्षा, ब्याज की गणना और ग्राहक को सोना वापस करने की शर्तें शामिल हैं।

इसके अलावा ग्राहकों के लिए यह भी स्पष्ट होना जरूरी होगा कि उनके आभूषणों का मूल्यांकन किस आधार पर होगा और योजना की अवधि पूरी होने पर उन्हें सोना किस रूप में वापस मिलेगा। योजना की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार प्रक्रिया को कितना सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाती है।

क्यों महत्वपूर्ण है Gold Monetisation Scheme?

भारत में सोने को केवल निवेश के रूप में ही नहीं, बल्कि पारिवारिक बचत और सामाजिक सुरक्षा के तौर पर भी देखा जाता है। बड़ी मात्रा में सोना घरों में पड़ा रहता है, लेकिन उसका अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष योगदान सीमित रहता है।

यदि इस सोने का कुछ हिस्सा Gold Monetisation Scheme के माध्यम से वित्तीय प्रणाली में आता है, तो इससे कई स्तरों पर लाभ संभव है—

  • देश में उपलब्ध निष्क्रिय सोने का इस्तेमाल बढ़ेगा।
  • सोने के आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
  • विदेशी मुद्रा की बचत में मदद मिल सकती है।
  • परिवारों को अपने सोने पर ब्याज अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
  • ज्वेलर्स और रिफाइनर्स को नई कारोबारी भूमिका मिल सकती है।
  • सोने को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी।

फिलहाल नई व्यवस्था को लेकर अंतिम नियम, ब्याज दर, पात्रता और ज्वेलर्स की भूमिका से जुड़े विस्तृत प्रावधान सरकार की ओर से स्पष्ट किए जाने बाकी हैं। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो यह भारत में घरों में रखे विशाल निजी गोल्ड स्टॉक को अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

 

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