नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, सज्जन कुमार को अस्पताल लाए जाने से पहले ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। दिल्ली कैंट के पालम कॉलोनी इलाके में पांच सिखों की हत्या और गुरुद्वारे में आग लगाए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2018 में उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने 31 दिसंबर 2018 को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।
सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने 1970 के दशक में राजनीति में कदम रखा और दिल्ली नगर निगम के पार्षद बनने के बाद दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव की जिम्मेदारी संभाली। वह 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा सांसद चुने गए। उन्हें कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था और वह बाहरी दिल्ली क्षेत्र में पार्टी का मजबूत चेहरा रहे।
1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में भड़के सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार पर भीड़ को भड़काने, हत्या और हिंसा में शामिल होने के आरोप लगे थे। करीब 34 वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
फरवरी 2025 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सरस्वती विहार मामले में भी सज्जन कुमार को दोषी ठहराया था। इस मामले में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़े आरोप थे और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 1984 दंगों से जुड़े कुछ अन्य मामलों, जिनमें सुल्तानपुरी और जनकपुरी-विकासपुरी मामले शामिल हैं, में उन्हें बरी किया जा चुका था। 2018 में दोषसिद्धि के बाद सज्जन कुमार ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
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