90% से अधिक रेगिस्तान, सालाना मात्र 103 मिमी बारिश — फिर भी नहीं होती पानी की कमी
डिसेलिनेशन और जीवाश्म जल के सहारे रेगिस्तान में बसाई जल-समृद्धि की मिसाल
22 अप्रैल 2026 | विशेष संवाददाता | भूगोल / पर्यावरण
सऊदी अरब—तेल संपदा के लिए दुनिया भर में चर्चित यह देश एक और अनोखी भौगोलिक सच्चाई के कारण भी ध्यान खींचता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा देश है, जहाँ एक भी स्थायी (बारहमासी) नदी नहीं बहती। विशाल क्षेत्रफल, कठोर जलवायु और सीमित वर्षा के बावजूद यहाँ के आम नागरिक को पानी की गंभीर कमी का सामना नहीं करना पड़ता—जो अपने आप में एक आश्चर्यजनक उदाहरण है।
नदियों के बिना देश: भूगोल की अनोखी कहानी
भूगोल के अनुसार, सऊदी अरब में कोई भी प्राकृतिक नदी साल भर नहीं बहती। यहाँ केवल “वादी” (सूखी नदी-घाटियाँ) पाई जाती हैं, जिनमें बारिश के दौरान कुछ समय के लिए पानी बहता है और फिर तेजी से सूख जाता है। वादी अल-रुम्मा इस तरह की सबसे प्रसिद्ध घाटियों में से एक है।
देश का लगभग 90 प्रतिशत भूभाग रेगिस्तानी या अर्ध-रेगिस्तानी है। यहाँ औसत वार्षिक वर्षा मात्र 103 मिलीमीटर दर्ज होती है, जो किसी स्थायी नदी के निर्माण के लिए बेहद अपर्याप्त है। दक्षिण-पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है, लेकिन वह भी स्थायी जलधारा बनाने में सक्षम नहीं है।
नदी न होने के तीन मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी अरब में नदियों की अनुपस्थिति के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
- अत्यधिक तापमान: गर्मी इतनी अधिक होती है कि पानी तेजी से वाष्पित हो जाता है।
- ग्लेशियरों का अभाव: अधिकांश नदियाँ बर्फ या ग्लेशियरों से निकलती हैं, जो यहाँ मौजूद नहीं हैं।
- कम और अनियमित वर्षा: वर्षा इतनी कम है कि स्थायी जलधारा बन ही नहीं पाती।
तकनीक के दम पर पानी की समस्या पर काबू
प्राकृतिक संसाधनों की कमी के बावजूद सऊदी अरब ने आधुनिक तकनीक के सहारे पानी की चुनौती को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है। देश में बड़े पैमाने पर डिसेलिनेशन (समुद्री जल को मीठा बनाने की प्रक्रिया) संयंत्र लगाए गए हैं। ये संयंत्र लाल सागर और अरब सागर के खारे पानी को शुद्ध कर पीने योग्य बनाते हैं।
आज सऊदी अरब दुनिया में सबसे अधिक डिसेलिनेटेड पानी उत्पादन करने वाले देशों में अग्रणी है। देश की बड़ी आबादी की जल-आपूर्ति इन्हीं संयंत्रों पर निर्भर करती है।
जीवाश्म जल: हजारों साल पुराना भंडार
इसके अलावा, सऊदी अरब भूमिगत जीवाश्म जल (फॉसिल वॉटर) का भी उपयोग करता है। यह जल हजारों वर्षों से जमीन के भीतर जमा है और सीमित मात्रा में उपलब्ध है। आधुनिक तकनीकों की मदद से इसे निकाला जाता है और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाया जाता है।
तेल की दौलत से मजबूत जल प्रबंधन
तेल से होने वाली आय ने सऊदी अरब को अत्याधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करने में मदद की है। बड़े जल भंडारण टैंक, लंबी पाइपलाइनें और उन्नत वितरण प्रणाली यह सुनिश्चित करती हैं कि दूर-दराज के इलाकों तक भी पानी की सप्लाई बनी रहे।
पड़ोसी देशों के लिए भी मॉडल
सऊदी अरब के पड़ोसी देश—कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान—भी इसी तरह की भौगोलिक चुनौतियों का सामना करते हैं और डिसेलिनेशन जैसी तकनीकों पर निर्भर हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी और सीमित प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए आने वाले दशकों में इन देशों के लिए टिकाऊ जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
📲 राष्ट्रीय, पंजाब और राजनीति की ताज़ा और प्रमाणिक खबरें सबसे पहले सीधे आपके WhatsApp पर पाएं।
💬 WhatsApp ग्रुप जॉइन करें
