जल्दबाजी में लाया गया विधेयक, परिसीमन और जनगणना पर उठाए सवाल
अमित शाह पर कटाक्ष, बीजेपी पर इतिहास छुपाने का आरोप
नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026
महिला आरक्षण विधेयक पर संसद के विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण से ऐसा प्रतीत हुआ जैसे भारतीय जनता पार्टी ही इस बिल की “चैंपियन, प्रस्तावक और सबसे बड़ी समर्थक” रही हो, जबकि सच्चाई इससे अलग है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में मजबूती से खड़ी रही है, लेकिन वर्तमान विधेयक की प्रक्रिया और टाइमिंग पर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल को “जल्दबाजी” में ला रही है और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करने की कोशिश कर रही है, जो उचित नहीं है। उनके अनुसार इतने बड़े बदलाव के लिए अद्यतन और ठोस आंकड़ों की आवश्यकता होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद के विस्तार की बात तो की जा रही है, लेकिन इस दिशा में कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है। साथ ही, उन्होंने विधेयक में ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर भी अस्पष्टता का मुद्दा उठाया और सरकार पर उनके अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने यह भी दावा किया कि सरकार चुनाव आयोग, न्यायपालिका और मीडिया जैसी संस्थाओं पर दबाव बना रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के विधेयक पारित होते हैं, तो देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
सदन में उस समय हल्का माहौल बन गया जब प्रियंका गांधी के संबोधन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुस्कुराते नजर आए। इस पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “गृहमंत्री जी हंस रहे हैं… चाणक्य आज होते तो आपकी राजनीतिक कुटिलता देखकर चौंक जाते।” उनके इस बयान पर सदन में मौजूद अन्य सदस्य भी मुस्कुरा उठे।
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में कांग्रेस सरकारों द्वारा महिला आरक्षण के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल सबसे पहले राजीव गांधी की सरकार ने की थी। बाद में पी.वी नरसिम्हाराव की सरकार ने इसे लागू किया, जिसके चलते आज लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
इसके अलावा उन्होंने 2010 में मनमोहन सिंहसरकार के प्रयासों का जिक्र किया, जब राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पारित हुआ था, लेकिन लोकसभा में सहमति नहीं बन पाई।
कांग्रेस नेता का यह बयान दर्शाता है कि विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए भी इसके क्रियान्वयन, परिसीमन और प्रतिनिधित्व जैसे अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है।
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