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संसद के विशेष सत्र में 33% महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में तेज़ी
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परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों में 50% तक बढ़ोतरी का दावा
नई दिल्ली:16 अप्रैल 2026
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। लोकसभा में संबोधन करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो भी इस ऐतिहासिक बिल का विरोध करेगा, उसे लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, “अब देश की बहनों पर भरोसा करने का समय है। 33 प्रतिशत महिलाओं को संसद में आने दें और उन्हें निर्णय लेने का अवसर दें।” उन्होंने इस क्षण को भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए कहा कि यह अवसर देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण में भागीदार बनाने का है।
सरकार द्वारा पेश किए गए प्रमुख विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। इनका उद्देश्य महिला आरक्षण कानून ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को प्रभावी रूप से लागू करना और नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में बहस के दौरान कहा कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद देश के हर राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। यह बदलाव जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व को और संतुलित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि यदि यह कदम 25-30 साल पहले उठा लिया गया होता, तो आज देश इस दिशा में और अधिक परिपक्वता हासिल कर चुका होता। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक अवसर को गंवाने न दें और मिलकर देश को नई दिशा देने में योगदान करें।
सरकार ने 14 अप्रैल 2026 को ही इन विधेयकों के ड्राफ्ट सांसदों के बीच वितरित कर दिए थे, ताकि चर्चा व्यापक और सार्थक हो सके। अब इस पर संसद में गहन बहस जारी है, और इसे भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
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