अंबिकापुर 11 अगस्त 2026
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला एक अजीबोगरीब मामला सरगुजा जिले से सामने आया है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में इलाज के दौरान जान गंवाने वाले एक पुलिस आरक्षक के निधन के 42 दिन बाद उनके स्वजन के मोबाइल पर आयुष्मान सारथी की ओर से संदेश पहुंचा कि मरीज स्वस्थ होकर अपने घर जा रहा है। संदेश देखकर मृतक की पत्नी हैरान रह गईं। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के बाद आया संदेश
जशपुर जिले के कटंगखार निवासी आरक्षक देवनारायण राम की तबीयत खराब होने पर उन्हें 26 जून 2026 को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 30 जून को उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन की ओर से उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी किया गया और परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया।
मृत्यु के करीब 42 दिन बाद, 11 अगस्त को उनकी पत्नी सीमा कुजूर के मोबाइल पर ‘आयुष्मान सारथी’ के नाम से एक संदेश आया। इसमें लिखा था- ‘प्रिय देवनारायण राम जी, हमें खुशी है कि आप स्वस्थ होकर अपने घर जा रहे हैं।’ संदेश देखकर परिवार के लोग सकते में आ गए, क्योंकि देवनारायण राम का 42 दिन पहले ही निधन हो चुका था।
पत्नी खुद स्टाफ नर्स, सिस्टम पर उठाए सवाल
मृतक की पत्नी सीमा कुजूर जशपुर जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि पति की मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार भी किया जा चुका है। ऐसे में आयुष्मान सारथी की ओर से आया यह संदेश स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सीमा कुजूर ने सवाल उठाया कि आखिर मरीज की मृत्यु के 42 दिन बाद भी सिस्टम में उनके स्वस्थ होकर घर जाने की जानकारी कैसे दर्ज हो गई? क्या यह तकनीकी गलती है या फिर आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में किसी तरह की गंभीर अनियमितता हुई है?
मामले के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अस्पताल के रिकॉर्ड में मरीज का इलाज मृत्यु के बाद भी जारी दिखाया जा रहा था। यदि ऐसा है तो इसकी वजह क्या है और रिकॉर्ड को अपडेट करने में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के संदेश मृतक के परिवार की भावनाओं को आहत करने के साथ उन्हें मानसिक रूप से भी परेशान करते हैं।
मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग में शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट जानकारी या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दिवंगत आरक्षक के नाम पर 42 दिन बाद ‘स्वस्थ होकर घर जाने’ का संदेश किस वजह से भेजा गया और आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में उनकी स्थिति क्या दर्ज थी।
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