चंडीगढ़, 28 अगस्त 2026
पंजाब सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य में एनालॉग यानी नॉन-डेयरी पनीर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से यह आदेश फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 30(2)(ए) के तहत जारी किया गया है।
सरकार के आदेश के बाद अब कोई भी फूड बिजनेस ऑपरेटर किसी भी नाम से एनालॉग पनीर का उत्पादन या कारोबार नहीं कर सकेगा। इसके अलावा इसे गोदाम में रखना, एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना, सप्लाई करना या खुले अथवा पैक रूप में बेचना भी प्रतिबंधित रहेगा।
डेयरी यूनिट से होटल-रेस्टोरेंट तक होगी जांच
प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए जिला स्तर पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सघन जांच के निर्देश दिए गए हैं। डेयरी यूनिट्स, पनीर फैक्ट्रियों, थोक विक्रेताओं, रिटेल दुकानों, कोल्ड स्टोर और गोदामों की जांच की जाएगी। पनीर की ढुलाई करने वाले वाहनों की भी चेकिंग होगी।
होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले पनीर की खरीद के रिकॉर्ड भी जांचे जाएंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रतिबंध की अवधि में कहीं से भी एनालॉग पनीर की खरीद या सप्लाई नहीं हो रही है।
पनीर के 43 फीसदी सैंपल फेल होने के बाद बड़ा फैसला
पंजाब में पनीर की गुणवत्ता को लेकर चलाए गए विशेष अभियान के दौरान बड़ी संख्या में सैंपल फेल पाए गए। पिछले साल विभाग ने 2,340 पनीर के सैंपल लिए थे, जिनमें से 1,027 सैंपल फेल पाए गए। इसके बाद संबंधित मामलों में 589 केस दर्ज किए गए। जांच के दौरान कुछ मामलों में पनीर में हानिकारक केमिकल के इस्तेमाल की बात भी सामने आई थी।
सरकार के सामने ऐसे मामले भी आए, जहां कथित तौर पर एनालॉग पनीर को असली डेयरी पनीर बताकर बाजार में बेचने की शिकायतें मिलीं। इसी को देखते हुए सरकार ने एनालॉग पनीर के खिलाफ सख्त कदम उठाया है।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर पारंपरिक डेयरी पनीर से अलग उत्पाद है। इसे मुख्य रूप से दूध के बजाय वनस्पति तेल या वसा, स्टार्च, मिल्क पाउडर और अन्य सामग्री का इस्तेमाल करके तैयार किया जाता है। यह जरूरी है कि ऐसे उत्पादों की प्रकृति और लेबलिंग उपभोक्ताओं के सामने स्पष्ट हो। समस्या तब पैदा होती है जब इसे असली डेयरी पनीर के नाम पर बेचे जाने की शिकायतें सामने आती हैं।
मुख्य उपयोग क्षेत्र
- फास्ट फूड और रेस्तरां: पिज्जा, बर्गर, सैंडविच और पास्ता में चीज या पनीर के सस्ते विकल्प के रूप में।
- कमर्शियल बेकरी और स्नैक्स: पेस्ट्री, बेकरी उत्पाद, सॉस, ड्रेसिंग और रेडी-टू-ईट फूड्स में।
- कम लागत वाले उत्पाद: जहां असली दूध से बने पनीर की जगह सस्ते इंग्रेडिएंट्स (जैसे वनस्पति वसा, पाम ऑयल, सोया/मटर प्रोटीन और स्टार्च) की आवश्यकता होती है।
उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई कारोबारी या दुकानदार एनालॉग पनीर का उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण या बिक्री करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बताया गया है कि पंजाब से पहले हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर को लेकर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराना तथा खाद्य मिलावट पर रोक लगाना है।
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