भारत के लिए अमेरिकी बाजार में बढ़ेगा मौका
वॉशिंगटन, 14 अगस्त 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने चीन पर ड्रोन के मामले में अमेरिकी निर्भरता कम करने के लिए विदेशी ड्रोन और उनके पार्ट्स के आयात पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खास ड्रोन और उनकी श्रेणियों पर अधिकतम 100 फीसदी एड वैलोरम टैरिफ लगाया जाएगा, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमता वाले नहीं होने वाले छोटे ड्रोन पर 25 फीसदी टैरिफ लागू होगा। ज्यादातर नए टैरिफ 3 सितंबर से प्रभावी होने की बात कही गई है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, यह कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और ड्रोन व उनके पार्ट्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि विदेशी निर्माताओं से यूएएस (Unmanned Aircraft Systems) के आयात पर अमेरिका की निर्भरता काफी अधिक है, जिससे सप्लाई चेन और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जोखिम पैदा हो सकते हैं।
चीन पर सबसे ज्यादा असर
हालांकि नए टैरिफ कई देशों से आने वाले ड्रोन पर लागू होंगे, लेकिन इसका सबसे बड़ा असर चीन पर पड़ने की संभावना है। चीन वैश्विक ड्रोन निर्माण में लंबे समय से दबदबा रखता है। चीनी कंपनी DJI की अमेरिकी कमर्शियल ड्रोन मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी बताई जाती है। अमेरिका में हॉलीवुड, कंटेंट क्रिएशन, रियल एस्टेट, कृषि, सर्विलांस और मैपिंग जैसे क्षेत्रों में चीनी ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारी टैरिफ के जरिए अमेरिकी कंपनियों को घरेलू स्तर पर ड्रोन निर्माण बढ़ाने और चीन से आने वाले उत्पादों पर निर्भरता घटाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
सहयोगी देशों के लिए अलग टैरिफ
अमेरिकी सरकार ने अपने कुछ प्रमुख व्यापारिक सहयोगियों से आने वाले ड्रोन और उनके पार्ट्स के लिए अलग-अलग टैरिफ दरें तय की हैं। यूरोपीय संघ, जापान, लिकटेंस्टीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान से आने वाले ड्रोन पर 15 फीसदी टैरिफ का प्रावधान है, जबकि ब्रिटेन से आने वाले ड्रोन पर 10 फीसदी एड वैलोरम टैरिफ लगाया जाएगा। जिन देशों के साथ अमेरिका ने व्यापार समझौते किए हैं, वहां संबंधित समझौते में तय दरें लागू होंगी।
ड्रोन पर अमेरिकी टैरिफ का ऐलान ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव जारी है। हाल में चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापारिक कदमों के जवाब में कुछ ड्रोन निर्यात पर रोक लगाने और अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। ऐसे में ड्रोन टेक्नोलॉजी अब दोनों देशों के बीच व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक अहम मुद्दा बनती जा रही है।
ट्रंप प्रशासन का ताजा फैसला अमेरिकी ड्रोन उद्योग को घरेलू स्तर पर मजबूत करने के साथ-साथ चीन के वैश्विक ड्रोन वर्चस्व को चुनौती देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत के लिए खुल सकता है बड़ा बाजार
अमेरिका द्वारा चीन से आने वाले ड्रोन पर भारी टैरिफ लगाए जाने से भारत समेत अन्य देशों के ड्रोन निर्माताओं के लिए अमेरिकी बाजार में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। खासकर सर्विलांस, कृषि, मैपिंग, इंडस्ट्रियल और अन्य कमर्शियल ड्रोन के क्षेत्र में भारतीय कंपनियां अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं।
भारत पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। ऐसे में अमेरिकी बाजार में चीनी ड्रोन की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कम होने से भारतीय ड्रोन कंपनियों के लिए निर्यात और वैश्विक विस्तार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
📲 राष्ट्रीय, पंजाब और राजनीति की ताज़ा और प्रमाणिक खबरें सबसे पहले सीधे आपके WhatsApp पर पाएं।
💬 WhatsApp ग्रुप जॉइन करें

