बिक्रम मजीठिया ने की दोबारा साथ आने की खुली पैरवी
पंजाब, 21 अगस्त 2026: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच दोबारा गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने दोनों दलों के फिर से साथ आने की खुलकर वकालत की है। उन्होंने पंजाब में सांप्रदायिक सौहार्द और हिंदू-सिख एकता का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अकाली दल और भाजपा को साथ आना चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व को करना है।
मजीठिया का यह बयान उनकी बहन और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल के बयान के एक दिन बाद आया है। हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब के विकास और प्रगति में मददगार रहे पुराने गठबंधनों के दोबारा बनने की बात कही थी। उनके बयान को भाजपा नीत NDA में अकाली दल की संभावित वापसी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
हरसिमरत के बयान का किया समर्थन
बिक्रम मजीठिया ने कहा कि हरसिमरत कौर बादल ने जो संकेत दिया है, वही पंजाब की जनता भी चाहती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और शिअद के पूर्व नेता प्रकाश सिंह बादल के बीच रहे गठबंधन का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों नेताओं का गठजोड़ भाईचारे, सांप्रदायिक सौहार्द और हिंदू-सिख एकता पर आधारित था।
मजीठिया के मुताबिक, अटल बिहारी वाजपेयी और प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में भाजपा और अकाली दल का गठबंधन पंजाब और केंद्र, दोनों स्तरों पर सफल रहा था। उन्होंने इसी पुराने गठबंधन की भावना को मौजूदा परिस्थितियों में भी महत्वपूर्ण बताया।
इससे एक दिन पहले संगरूर में अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब के विकास और केंद्र सरकार के सहयोग को लेकर बात की थी।
उन्होंने कहा था कि अगर पहले की तरह ऐसे समझौते बनें, जिनसे दिल्ली से विकास के काम पंजाब तक पहुंचें, तो प्रदेश में बड़े विकास कार्यों की नींव रखी जा सकती है।
हालांकि, हरसिमरत कौर बादल ने अपने बयान में भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन की कोई सीधी घोषणा नहीं की थी। इसके बावजूद उनके बयान के बाद दोनों दलों के दोबारा साथ आने की राजनीतिक अटकलों को बल मिला है।
सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें
अकाली दल और भाजपा के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाओं को उस समय और हवा मिली थी, जब इस महीने की शुरुआत में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके कार्यालय में मुलाकात की थी।
इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में दोनों दलों के बीच संभावित सियासी नजदीकी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम मजीठिया के बयानों ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है।
तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूटा था गठबंधन
गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा रहा था। हालांकि, केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया और अकाली दल ने NDA से अलग होने का फैसला किया था।
अब पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के नेताओं की ओर से गठबंधन को लेकर दिए जा रहे बयानों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
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