हंगामे और तीखी बहस के बीच ध्वनिमत से पास हुआ विधेयक; 10 साल तक जेल, ₹10 करोड़ तक जुर्माना और फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026
लोकसभा ने बुधवार को लंबी चर्चा, तीखी बहस और विपक्ष के हंगामे के बीच ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026′ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही 30 जुलाई सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक हुई। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान को लेकर भी सदन में हंगामा देखने को मिला। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि विपक्ष इस महत्वपूर्ण कानून पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में लगा रहा। उन्होंने कहा कि यह संशोधन प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता और विश्वसनीयता बहाल करने के उद्देश्य से लाया गया है तथा इसके जरिए पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ सजा और आर्थिक दंड को पहले से कहीं अधिक कठोर बनाया गया है।
सरकार ने विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब
जितेंद्र सिंह ने सदन में उठाए गए एक अन्य मुद्दे पर कहा कि जिस घटना का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोली चलाने का आदेश देने का अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं बल्कि संबंधित मजिस्ट्रेट के पास होता है।
उन्होंने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने संबंधित घटना में सर्वोच्च संयम बरता और कोई जनहानि नहीं हुई। वहीं प्रियंका गांधी द्वारा देश में पिछले वर्षों में 152 पेपर लीक और करोड़ों छात्रों के प्रभावित होने के दावे पर उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों का कोई स्पष्ट आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि 2024 में लागू कानून के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
संशोधित कानून में क्या हुआ सख्त?
व्यक्तिगत दोषियों के लिए
- जेल की सजा: 3-5 वर्ष से बढ़ाकर 5-10 वर्ष
- जुर्माना: ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख तक
सर्विस प्रोवाइडर (एजेंसियों) के लिए
- जुर्माना: ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ तक
- ब्लैकलिस्टिंग: 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष तक
पेपर लीक माफिया के लिए
- जेल की सजा: 5-10 वर्ष से बढ़ाकर 7-10 वर्ष
- जुर्माना: ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ तक
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध जांच
संशोधन विधेयक के तहत पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा। साथ ही, केंद्रीय एजेंसी या विशेष जांच दल (एसटीएफ) को दो महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य होगा।
राहुल गांधी बोले- ‘मेरा माइक बंद कर सकते हैं, छात्रों की आवाज नहीं’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि संसद में अपने भाषण के दौरान उन्होंने दिल्ली में छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों का मुद्दा उठाया, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने लिखा, “मेरा माइक बंद कर सकते हैं, लेकिन छात्रों की गूंज नहीं। आज मैं वह सब कहूंगा जो सदन में कहने नहीं दिया गया।”
प्रह्लाद जोशी और अमित शाह ने बताया ऐतिहासिक कानून
लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह ऐतिहासिक कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता की रक्षा करेगा और युवाओं का विश्वास मजबूत करेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ देश के सबसे कड़े दंडात्मक प्रावधान लेकर आया है और यह करोड़ों युवाओं के सपनों एवं आकांक्षाओं की रक्षा करेगा।
मायावती ने उठाया सवाल
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित होता है और कई बार आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं भी सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा सख्त कानून बनाना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन केवल कानून बना देने से समस्या का स्थायी समाधान होगा या नहीं, इस पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
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