रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बड़ा फैसला
7 March 2026
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चर्चित रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए गुरमीत राम रहीम सिंह को राहत दी है। अदालत ने उनकी अपील स्वीकार करते हुए उन्हें हत्या के इस मामले से बरी कर दिया है। हालांकि मामले के अन्य तीन दोषियों—कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और किशन लाल—की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है।
इस फैसले को जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पत्रकार को 2002 में मारी गई थी गोली
सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को अक्तूबर 2002 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका इलाज चलता रहा, लेकिन 21 नवंबर 2002 को उनकी मौत हो गई। यह मामला उस समय काफी चर्चा में आया था क्योंकि छत्रपति अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े विवादित मामलों को प्रकाशित कर रहे थे।
2019 में CBI अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद
लंबी जांच और सुनवाई के बाद 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत राम रहीम सिंह सहित चार आरोपियों—कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल—को दोषी ठहराया था।
अदालत ने सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद राम रहीम ने इस फैसले को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पहले अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने अपील पर फैसला सुनाते हुए राम रहीम की सजा को रद्द कर दिया और उन्हें बरी कर दिया। राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि अदालत ने पत्रकार छत्रपति की हत्या के मामले में उनके मुवक्किल को दोषमुक्त कर दिया है। हालांकि इस मामले में राहत मिलने के बावजूद गुरमीत राम रहीम सिंह को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। वह अन्य मामलों में सजा काट रहे हैं, इसलिए इस फैसले से उनकी तत्काल रिहाई संभव नहीं है। हाईकोर्ट का यह फैसला इस बहुचर्चित हत्याकांड में बड़ा मोड़ माना जा रहा है। एक ओर जहां राम रहीम को राहत मिली है, वहीं अन्य तीन दोषियों की सजा बरकरार रखकर अदालत ने मामले में अपनी अलग-अलग जिम्मेदारी तय की है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अब इस फैसले के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बनी रह सकती है।
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