इजरायल–ईरान संघर्ष पर राज्यसभा में बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विपक्ष का जोरदार विरोध
- भारत ऊर्जा सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध
- ईरान से भारतीयों को अर्मेनिया के रास्ते निकाला गया
- बयान के दौरान I.N.D.I.A गठबंधन के सांसदों का संसद के भीतर और बाहर प्रदर्शन
9 March 2026
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन राज्यसभा में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और इजरायल–ईरान संघर्ष को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने सरकार की ओर से बयान देते हुए कहा कि भारत किसी भी संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को ही सबसे प्रभावी रास्ता मानता है।
राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रम भारत के लिए गहरी चिंता का विषय हैं और भारत सरकार क्षेत्र के हालातों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा करना है।
विदेश मंत्री ने बताया कि संघर्ष की स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान में फंसे कुछ भारतीय नागरिकों को अर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि Narendra Modi ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों के नेताओं से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि मौजूदा संघर्ष में कई लोगों की जान गई है, जिनमें ईरान के नेतृत्व से जुड़े लोग भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और विवादों को बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से ही संभव है।”
विपक्ष का संसद में विरोध
हालांकि विदेश मंत्री के बयान के दौरान विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई और सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष का आरोप था कि सरकार को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
बयान के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले I.N.D.I.A गठबंधन के सांसदों ने संसद के भीतर और बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi, कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, K. C. Venugopal और Priyanka Gandhi Vadra सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए।
संसद भवन के बाहर विरोध कर रहे सांसदों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बैनरों पर लिखा था –
“खाड़ी जल रही है, तेल संकट है, भारतीय फंसे हुए हैं। भारत को चुप्पी नहीं, नेतृत्व चाहिए।”
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार को पश्चिम एशिया के संकट पर अधिक स्पष्ट और मजबूत कूटनीतिक पहल करनी चाहिए।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत की नजर
विदेश मंत्री ने अपने बयान के अंत में कहा कि भारत सरकार पश्चिम एशिया के हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि भारत हमेशा तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वकालत करता रहा है।
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