सोनम वांगचुक ने कहा- यह लोकतंत्र और युवाओं की जीत, रामदास अठावले बोले- सरकार सुधारों के लिए प्रतिबद्ध
नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच शनिवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लंबे समय से छात्र संगठन और प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया।
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए एक भावनात्मक संदेश भी लिखा। उन्होंने कहा कि वह पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं और उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होती है।
प्रधान ने अपने दो पृष्ठों के इस्तीफे में शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए यह भी लिखा कि कुछ लोगों ने युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया। उन्होंने पत्र में दो स्थानों पर इस बात का विशेष रूप से जिक्र किया कि छात्रों के बीच गलत धारणाएं फैलाने की कोशिश की गई।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। छात्र एक-दूसरे को बधाई देते हुए नजर आए और आंदोलन स्थल पर नारेबाजी तथा जश्न का माहौल बन गया।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा कि शुरुआत में कहा जा रहा था कि इस सरकार में कोई इस्तीफा नहीं देता, लेकिन जनता की आवाज़ के सामने सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा, “वे कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”
छात्र आंदोलन की शुरुआत से समर्थन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी छात्रों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह लोकतंत्र की जीत है और यह जीत सीधे जनता की आवाज़ से निकली है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की विजय है। उन्होंने CJP, देश के युवाओं और उन सभी नागरिकों को बधाई दी जिन्होंने बिना डरे देशभर से छात्रों के समर्थन में आवाज़ उठाई। उन्होंने कहा कि अब जवाबदेही तय होने के बाद शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का समय है।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की दिशा में काम कर रही है और आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और उम्मीद जताई कि अब आंदोलन का जल्द समाधान निकलेगा।
अठावले ने यह भी बताया कि आंदोलन के दौरान अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन करीब 9 से 9.5 किलोग्राम तक कम हो गया था। स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल जाकर उनसे मुलाकात की और उनका अनशन समाप्त करवाया।
दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब देश के कई राज्यों और शहरों तक फैल चुका है। NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर हजारों छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को आंदोलन की पहली बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है। वे परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने की मांग पर आगे भी दबाव बनाए रखेंगे।
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