- एलपीजी की किल्लत से निपटने के लिए सरकार का बड़ा कदम: रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश, ESMA और आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू
- मिडिल ईस्ट तनाव का असर: LPG संकट से निपटने के लिए केंद्र का बड़ा फैसला
- रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश, ESMA और आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू; घरेलू सिलेंडरों की सप्लाई बढ़ाने पर जोर
- गैस संकट पर सरकार सख्त: रिफाइनरियों को बढ़ाना होगा LPG उत्पादन
- ईरान-इजरायल तनाव के बीच केंद्र ने लागू किया ESMA; कमर्शियल गैस की सप्लाई कई राज्यों में सीमित
- घरेलू गैस सप्लाई को प्राथमिकता, पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को एलपीजी पूल में गैस भेजने का निर्देश
- दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई सीमित, सरकार ने बनाई तीन सदस्यीय कमेटी
- आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू, गैस सप्लाई को चार कैटेगरी में बांटकर वितरण की नई व्यवस्था
10 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के असर से भारत में गैस आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। संभावित संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए देश की तेल रिफाइनरियों को एलपीजी (LPG) का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही सरकार ने कमर्शियल सिलेंडरों की बजाय घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि आम जनता को रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
सरकार ने यह निर्देश आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) के तहत मिली आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जारी किया है। इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण तेल-गैस सप्लाई में संभावित व्यवधानों से देश में घरेलू गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
मिडिल ईस्ट संकट का भारत पर असर
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के चलते मिडिल ईस्ट में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे में गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर अभी भी उपलब्ध हैं, लेकिन कई राज्यों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी देखने को मिल रही है। इसकी वजह से होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट कारोबार प्रभावित होने लगे हैं।
कई राज्यों में कमर्शियल गैस सप्लाई पर रोक
दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों ने फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर रोक लगा दी है या इसे सीमित कर दिया है। गैस की कमी के कारण कई शहरों में रेस्टोरेंट और होटल बंद होने की नौबत आ गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, तेल कंपनियां जल्द ही तीन सदस्यीय कमेटी के जरिए रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बातचीत करेंगी, ताकि गैस सप्लाई से जुड़ी समस्याओं को समझकर समाधान निकाला जा सके।
जमाखोरी रोकने के लिए लागू किया गया EC एक्ट
सरकार ने गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) भी लागू कर दिया है। इसके तहत सरकार स्टॉक की सीमा तय कर सकती है और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई कर सकती है।
गैस सप्लाई को चार कैटेगरी में बांटा
गैस की उपलब्धता को संतुलित रखने के लिए सरकार ने सप्लाई को चार श्रेणियों में विभाजित किया है—
- पहली कैटेगरी (पूरी सप्लाई)
- घरेलू रसोई गैस (PNG)
- वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG
इन दोनों क्षेत्रों को पहले की तरह पूरी गैस सप्लाई दी जाएगी।
- दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने)
- उर्वरक बनाने वाली फैक्ट्रियों को लगभग 70% गैस दी जाएगी।
- उन्हें यह प्रमाण देना होगा कि गैस का उपयोग केवल खाद उत्पादन में किया गया है।
- तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग)
- नेशनल गैस ग्रिड से जुड़े बड़े उद्योगों और चाय फैक्ट्रियों को उनकी जरूरत की लगभग 80% गैस दी जाएगी।
- चौथी कैटेगरी (छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट)
- शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के आधार पर लगभग 80% गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
पेट्रोकेमिकल उपयोग पर रोक
सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को भी निर्देश दिया है कि वे गैस का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पाद या अन्य औद्योगिक कार्यों में न करें। इसके बजाय गैस को सीधे एलपीजी पूल में भेजा जाए ताकि घरेलू सिलेंडरों की सप्लाई बढ़ाई जा सके।
क्या है ESMA?
आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) एक ऐसा कानून है जिसे जरूरी सेवाओं को बाधित होने से बचाने के लिए लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनता के दैनिक जीवन से जुड़ी आवश्यक सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें।
इसमें सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली, पानी जैसी सेवाएं शामिल होती हैं। जरूरत पड़ने पर सरकार इस कानून के जरिए आपातकालीन आदेश जारी कर सकती है।
क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955?
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) के तहत सरकार जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है।
सरकार इस कानून के तहत स्टॉक सीमा तय कर सकती है और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई कर सकती है।
सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में घरेलू रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित न हो और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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