काठमांडू, 26 अगस्त 2026
नेपाल में बुधवार तड़के तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट जिलों में तेज जलप्रवाह ने कई गांवों, सड़क मार्गों, पुलों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत की ओर से आए तेज जलप्रवाह के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में अफरा-तफरी मच गई। रसुवा जिले के टिमुरे और स्याफ्रुबेसी समेत कई इलाकों में घरों, दुकानों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
105 भारतीयों समेत 579 पर्यटक लापता
नेपाली पुलिस के मुताबिक, अब तक 579 पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 466 विदेशी नागरिक और 113 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिक 28 अलग-अलग देशों के बताए जा रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या में कैलाश-मानसरोवर यात्रा और हिमालयी क्षेत्रों की यात्रा पर गए पर्यटकों के होने की आशंका जताई
जा रही है। इसके अलावा 54 अमेरिकी और 33 ब्रिटिश नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल के पर्यटन अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में संचार और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण कई पर्यटकों और स्थानीय लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल सरकार ने भारत और चीन से मांगी मदद
नेपाल सरकार ने इस भीषण आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य तेज करने के लिए भारत और चीन से मदद की गुहार लगाई है। भारत ने भी स्थिति पर नजर रखते हुए NDRF की कई टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है। नेपाल के प्रधानमंत्री ने बाढ़ में अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि की है। हालांकि, राहत और बचाव अभियान पूरा होने के बाद मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की आशंका है।
तिब्बत में भी भारी नुकसान
चीन के सरकारी मीडिया चैनल सीसीटीवी ने तिब्बत क्षेत्र में भी भारी पैमाने पर नुकसान होने की जानकारी दी है। काठमांडू के उत्तर में स्थित रसुवा क्षेत्र तिब्बत से सटा हुआ है और चीन-नेपाल के प्रमुख व्यापारिक मार्गों में शामिल है। अचानक आई इस आपदा ने सीमा पार के हिमालयी इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।
फिलहाल नेपाल में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती लापता पर्यटकों और स्थानीय लोगों तक पहुंचना तथा कटे हुए इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है।
भारत में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा, यूपी-बिहार अलर्ट पर
नेपाल में अचानक बढ़े जलप्रवाह का असर भारत में प्रवेश करने वाली नदियों पर भी पड़ सकता है। नेपाल की कई नदियां बिहार और उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्सों से होकर गुजरती हैं। ऐसे में सीमावर्ती इलाकों में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है।
नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है और केंद्र सरकार भी स्थिति की निगरानी कर रही है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
(नोट: आपदा से जुड़ी मृतकों और लापता लोगों की संख्या राहत एवं बचाव कार्य के साथ बदल सकती है।)
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