नई दिल्ली/यरुशलम: इजराइल पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री को विशेष गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने इजराइली संसद को संबोधित करते हुए भारत-इजराइल संबंधों, आतंकवाद, व्यापार, इनोवेशन और क्षेत्रीय शांति जैसे अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट नीति रखी।
प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर को हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत उन सभी परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है और इस कठिन समय में इजराइल के साथ मजबूती से खड़ा है।
उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों का भी जिक्र किया और कहा कि भारत भी लंबे समय तक आतंकवाद का दंश झेल चुका है। निर्दोष लोगों की हत्या को किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद समाज को अस्थिर करता है, विकास को रोकता है और विश्वास को खत्म करता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त और निरंतर कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो शांति और स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।
प्रधानमंत्री ने इंटरनेशनल होलोकॉस्ट रिमेम्बरेंस डे का जिक्र करते हुए कहा कि यह मानव इतिहास का एक दुखद अध्याय है। उन्होंने गुजरात के नवानगर के महाराजा जाम साहेब का उल्लेख किया, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश और यहूदी बच्चों को शरण दी थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इजराइल व्यापार बढ़ाने, निवेश प्रवाह मजबूत करने और संयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। हाल ही में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश संधि से व्यापार में विश्वास और स्थिरता बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि भारत कई देशों के साथ महत्वपूर्ण व्यापार समझौते कर चुका है और एक व्यापक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत जारी है।
प्रधानमंत्री ने इजराइल को “स्टार्टअप नेशन” बताते हुए कहा कि भारत भी युवाओं के नवाचार को प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने 2018 में I-Create टेक बिजनेस इनक्यूबेटर के उद्घाटन का जिक्र किया और बताया कि अब तक 900 से अधिक स्टार्टअप को समर्थन दिया गया है।
उन्होंने हाल ही में आयोजित वैश्विक AI इम्पैक्ट समिट का भी उल्लेख किया जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इजराइल दो प्राचीन सभ्यताएं हैं। उन्होंने “टिक्कुन ओलम” और “वसुधैव कुटुंबकम” जैसे सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की दार्शनिक परंपराएं विश्व कल्याण और साझा जिम्मेदारी पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत गाजा शांति पहल का समर्थन करता है और क्षेत्र में स्थायी व टिकाऊ शांति चाहता है, जिसमें फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान भी शामिल हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 4,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने इस क्षेत्र में बलिदान दिया था। उन्होंने इजराइल में योग के बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है और जल्द ही शीर्ष तीन वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने संतुलित व्यापार और वैश्विक साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

