नई दिल्ली: भारत अपनी वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी की ताकत देने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना रूस के एडवांस Su-57M1E फाइटर जेट को सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत खरीदने पर विचार कर रही है। भारत शुरुआती बेस मॉडल में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा, बल्कि अपग्रेडेड और ज्यादा ताकतवर वर्जन लेना चाहता है।
क्या है Su-57M1E और क्यों है खास?
रूस का मूल Sukhoi Su-57 जब सेवा में शामिल हुआ था, तब इसे तकनीकी उपलब्धि माना गया था। हालांकि शुरुआती वर्जन में इंजन और स्टील्थ डिजाइन को लेकर कुछ कमियां सामने आई थीं। अब M1E वर्जन में कई बड़े सुधार किए गए हैं।
1. ज्यादा ताकतवर इंजन
- बिना आफ्टरबर्नर के लगभग Mach 1.6 की सुपरक्रूज क्षमता
- करीब 15-20% ज्यादा ताकत
- बेहतर स्पीड और फुर्ती
पहले वर्जन में अस्थायी इंजन थे, जिससे लगातार सुपरक्रूज में दिक्कत होती थी। नए इंजन से यह समस्या काफी हद तक दूर होने का दावा है।
2. स्टील्थ डिजाइन में सुधार
पहले मॉडल के गोल इंजन नोज़ल को लेकर सवाल उठे थे। नए वर्जन में डिजाइन में बदलाव किया गया है, जिससे रडार पर पकड़ कम होने का दावा किया जा रहा है। इसकी तुलना अमेरिकी F-22 Raptor की डिजाइन से की जा रही है।
3. आधुनिक कॉकपिट
- बड़ा Wide-Area Display
- 360 डिग्री हेलमेट डिस्प्ले
- कई सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक
4. एडवांस रडार सिस्टम
इसमें N036 Byelka रडार सिस्टम लगाया गया है, जो जैमिंग से बेहतर तरीके से निपट सकता है। L-बैंड रडार होने से स्टील्थ विमानों, जैसे F-35 Lightning II, को पहचानने की क्षमता बेहतर बताई जा रही है।
G2G मॉडल से तेजी संभव
सूत्रों के अनुसार यह सौदा सरकार-से-सरकार (G2G) मॉडल के तहत आगे बढ़ सकता है। रूस ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत में उत्पादन का विकल्प दिया है, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता तेजी से विमान शामिल करने पर है।
करीब 40 विमानों की खरीद संभव
अगर यह सौदा आगे बढ़ता है, तो भारतीय वायुसेना करीब 40 विमान यानी लगभग दो स्क्वाड्रन खरीद सकती है। इससे वायुसेना की ताकत में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हो सकती है।
AMCA के साथ संतुलन
भारत अपना स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) भी विकसित कर रहा है। ऐसे में Su-57M1E की संभावित खरीद को एक अंतरिम रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, ताकि पांचवीं पीढ़ी की क्षमता तुरंत मजबूत की जा सके।
अगर भारत और रूस के बीच यह समझौता आगे बढ़ता है, तो यह भारतीय वायुसेना के लिए बड़ा रणनीतिक फैसला साबित हो सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद ही लिया जाएगा।

