नई दिल्ली, 17 जनवरी 2025: वैज्ञानिकों ने हंटिंग्टन रोग के कारण और उसके प्रभाव को लेकर नई जानकारी साझा की है। यह गंभीर न्यूरोडिजेनेरेटिव बीमारी मस्तिष्क के खास न्यूरॉन्स को धीरे-धीरे प्रभावित करती है। शोधकर्ताओं ने डीएनए रिपीट्स के विस्तार और इसके घातक प्रभाव को समझने में बड़ी सफलता हासिल की है।
हंटिंग्टन रोग एक आनुवंशिक बीमारी है, जो HTT जीन में “CAG” डीएनए अनुक्रम के बार-बार दोहराव के कारण होती है। यदि यह अनुक्रम 40 या अधिक बार दोहराया जाए, तो व्यक्ति में इस रोग का खतरा लगभग तय हो जाता है।
एक नई रिसर्च के मुताबिक, इस रोग के लक्षण शुरुआती दशकों में सामने नहीं आते। डीएनए रिपीट्स का विस्तार मस्तिष्क में धीरे-धीरे होता है। जब यह 150 से अधिक रिपीट्स तक पहुंचता है, तब यह न्यूरॉन्स को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर देता है और उनकी मृत्यु हो जाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- शुरुआती 20 वर्षों में CAG रिपीट्स का विस्तार बेहद धीमा होता है।
- एक बार जब रिपीट्स की संख्या 80 तक पहुंचती है, तो विस्तार की गति तेज हो जाती है।
- न्यूरॉन्स को 150 से अधिक रिपीट्स पर गंभीर नुकसान पहुंचता है।
लक्षण:
हंटिंग्टन रोग से पीड़ित व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण देखे जा सकते हैं:
- मांसपेशियों की अनियंत्रित हलचल
- याददाश्त और संज्ञानात्मक समस्याएं
- भावनात्मक अस्थिरता
- धीरे-धीरे चलने और निगलने में कठिनाई
इलाज के नए विकल्प:
शोधकर्ताओं का मानना है कि डीएनए रिपीट्स के विस्तार को रोककर इस रोग के प्रभाव को धीमा किया जा सकता है।
- डीएनए रिपीट्स को रोकने वाले उपचार: HTT जीन में रिपीट्स के विस्तार को नियंत्रित करने के लिए नई दवाएं विकसित की जा रही हैं।
- डीएनए-रिपेयर प्रोटीन को लक्षित करना: MSH3 जैसे प्रोटीन, जो रिपीट्स को बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं, को नियंत्रित करने पर शोध हो रहा है।
मानवीय योगदान:
यह अध्ययन 53 हंटिंग्टन रोगियों और 50 स्वस्थ व्यक्तियों के मस्तिष्क दान पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने इन दानों के माध्यम से रोग के चरण-दर-चरण प्रभाव को समझने में सफलता पाई।
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