नई दिल्ली: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स एसोसिएशन (BIA) ने लोकप्रिय यूट्यूबर और पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया उर्फ ‘BeerBiceps’ द्वारा ‘इंडियाज गॉट लेटेंट्स’ शो पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। BIA का कहना है कि यह मामला इन्फ्लुएंसर्स और पॉडकास्टर्स के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि यह ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का पहला बड़ा प्रयास है।
BIA के महासचिव नीलकंठ बक्षी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा,
“सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर @BeerBicepsGuy ने अपनी असली मानसिकता दिखा दी है। कॉमेडी के नाम पर उन्होंने जो कुछ कहा, वह न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि नैतिकता की हर सीमा को लांघता है। मैं उनकी टिप्पणियों से व्यथित हूं और इसकी कड़ी निंदा करता हूं।”
नीलकंठ बक्षी 2017-19 के दौरान भाजपा की दिल्ली संचार टीम का हिस्सा रह चुके हैं। वहीं, BIA की अध्यक्ष APN न्यूज चैनल की संपादक राजश्री राय हैं।
बक्षी ने कहा कि रणवीर अल्लाहबादिया द्वारा की गई आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां अत्यधिक निंदनीय हैं और इस पर तुरंत अंकुश लगाने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा,
“यदि इस तरह के बयानों पर रोक नहीं लगाई गई, तो ऑनलाइन संवाद का स्तर गिरता चला जाएगा।”
BIA न केवल यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण की मांग कर रहा है, बल्कि इन्फ्लुएंसर्स की समस्याओं जैसे भुगतान, अनुबंध और प्लेटफॉर्म्स की पॉलिसी को लेकर भी सहायता करने का दावा कर रहा है।
BIA में 350 से अधिक डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स शामिल हैं, जिनमें टेक गुरुजी और अंकित बैयानपुरिया जैसे चर्चित नाम भी हैं। अंकित बैयानपुरिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फिटनेस अभियान में भी नजर आए थे।
इसके अलावा, BIA में कानूनी विशेषज्ञ भी जुड़े हुए हैं, जो इन्फ्लुएंसर्स को ऑनलाइन कंटेंट से जुड़े कानूनी पहलुओं में मार्गदर्शन देते हैं।
बक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि इन्फ्लुएंसर्स पर फॉलोअर्स का काफी दबाव रहता है, खासतौर पर यह सवाल उठाया जाता है कि वे सत्तारूढ़ भाजपा और केंद्र सरकार के कितने करीब हैं। हाल ही में भारत सरकार द्वारा डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को पुरस्कार देने के बाद कई लोगों ने आरोप लगाए कि पुरस्कार विजेताओं की विचारधारा भाजपा के पक्ष में थी।
उन्होंने कहा कि BIA इन्फ्लुएंसर्स को एक स्वतंत्र मंच प्रदान करेगा, जहां वे अपनी चिंताओं को व्यक्त कर सकें और संगठित होकर अपनी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा कर सकें।
भारत में पारंपरिक मीडिया संस्थान वर्षों से संगठित रहे हैं, लेकिन अब यह लगता है कि इन्फ्लुएंसर्स और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर्स भी एकजुट हो रहे हैं। BIA का यह कदम यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए नए नियमों और गाइडलाइंस को लागू करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।
Leave a Comment