-
जब 3 सितंबर तक राघव चड्ढा पंजाब के वोटर थे और 31 अगस्त को दिल्ली के ड्रॉफ्ट रोल में नाम ही नहीं था, तो अब नाम कैसे दिखा रहा?- अनुराग ढांडा
-
– 31 अगस्त को दिल्ली के डाफ्ट रोल में राजेंद्र नगर बूथ पर 746 वोट थे, 747वां वोट राघव चड्ढा का कैसे और कब जुड़ा?- अनुराग ढांडा
नई दिल्ली, 08 सितंबर 2026
आम आदमी पार्टी ने एसआईआर के जरिए लोगों के वोट काटने और जोड़ने का खेल कर रही भाजपा और उसके चुनाव आयोग को मंगलवार को एक्सपोज कर दिया। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा से बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग के जरिए फर्जीवाड़ा कर राघव चड्ढा को दिल्ली का वोटर बना दिया है। जबकि 3 सितंबर तक राघव चड्ढा पंजाब के वोटर थे। 31 अगस्त को आए दिल्ली के डाफ्ट रोल में राजेंद्र नगर बूथ पर सिर्फ 746 वोट थे, लेकिन बाद में 747वां वोट राघव चड्ढा का जोड़ दिया गया, जो संभव ही नहीं था। 3 सितंबर को राघव चड्ढा ने खुद दावा किया था कि वह पंजाब के वोटर हैं और ‘‘आप’’ सरकार ने पंजाब के ड्राफ्ट रोल से उनका नाम कटवा दिया है। ऐसे में चुनाव आयोग बताए कि क्या राघव चड्ढा का वोट पंजाब से दिल्ली ट्रांफसर हुआ और क्या एपिक नंबर पंजाब का ही है?
मंगलवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि एसआईआर में खुलेआम भाजपा की दादागिरी चल रही है। एसआईआर में जिसका चाहे नाम जोड़ दिया जाता है और जिसका चाहे नाम काट दिया जाता है। इसके लिए कोई प्रक्रिया नहीं है, जो जरूरी चीजें हैं वो फॉलो नहीं करनी हैं। एसआईआर के नाम पर वोट जोड़ने और काटने का खुलेआम एक ऐसा धंधा चल रहा है जिससे लोकतंत्र को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।
अनुराग ढांडा ने याद दिलाया कि 3 सितंबर को सुबह-सुबह उठते ही राघव चड्ढा ने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट किया था और उसमें आरोप लगाए थे कि पंजाब सरकार ने उनका वोट कटवा दिया है। जबकि सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं होता है। भाजपा खुद कहती है कि यह चुनाव आयोग का काम है। राघव चड्ढा ने लिखा था कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने अपनी बदले की राजनीति को ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल तक पहुंचा दिया है। राघव चड्ढा का दावा था कि ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल से उनका वोट सिर्फ इसलिए काट दिया गया क्योंकि वहां सरकार विरोध की राजनीति कर रही है। राघव चड्ढा ने कहा था कि वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में रजिस्टर्ड है, फिर भी उनका नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में शिफ्टेड दिखा दिया गया।
अनुराग ढांडा ने मीडिया को एक वीडियो दिखाते हुए कहा कि जहां राघव चड्ढा रहने का दावा कर रहे हैं या जहां के वोटर होने का दावा कर रहे हैं, वहां की जमीनी स्थिति इस वीडियो से स्पष्ट होता है। 3 सितंबर की सुबह राघव चड्ढा कह रहे थे कि उनका वोट जबरदस्ती काट दिया गया है और वह वहीं रहते हैं। लेकिन जब वहां जाकर देखा गया तो उस 103 नंबर फ्लैट में राघव चड्ढा तो नहीं रह रहे थे, वहां दीमक जरूर रह रही थे। अब अगर दीमक का नाम ही राघव चड्ढा है तो हमें पता नहीं, यह बात राघव चड्ढा खुद क्लेम करके स्पष्ट करेंगे। लेकिन 3 सितंबर को जब यह दावा किया जाता है कि पंजाब से वोट काट दिया गया, तो इसका सीधा मतलब है कि वह पंजाब में अपना वोट होने का दावा कर रहे हैं। राघव चड्ढा ने खुद कहा कि ड्राफ्ट रोल में उनका वोट हटाया गया है, प्रक्रिया अभी बाकी है और वह एसआईआर में क्लेम करके अपना वोट दोबारा से वोटर लिस्ट में जुड़वाएंगे।
अनुराग ढांडा ने कहा कि इससे राघव चड्ढा ने अपने तथ्यों में तीन बातें बिल्कुल स्पष्ट कर दीं। पहला, वह खुद को पंजाब का वोटर होने का दावा कर रहे हैं। दूसरा, गलत तरीके से उनका वोट काटा गया है और तीसरा, वह पूरी प्रक्रिया का पालन करके पंजाब में ही अपना वोट बनवाएंगे। ये तीनों चीजें इस बात को साबित करती हैं कि राघव चड्ढा खुद को दिल्ली का वोटर नहीं मान रहे थे। इसका मतलब उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली में उनका कोई वोट नहीं है, क्योंकि एक साथ दो जगह वोट नहीं हो सकता। राघव चड्ढा ने 3 सितंबर की सुबह यह साफ कर दिया कि दिल्ली में उनका कोई वोट नहीं है, वह पंजाब के ही वोटर हैं और वहीं रहना चाहते हैं।
अनुराग ढांडा ने कहा कि इससे पहले दिल्ली के अंदर 31 अगस्त को ड्राफ्ट रोल जारी हुआ। राजेंद्र नगर के जारी ड्राफ्ट रोल में कहीं पर भी राघव चड्ढा का नाम नहीं है। उस सूची में उनके बूथ पर कुल 746 वोटर दिखाए गए हैं और समरी में भी यही स्पष्ट है कि इस बूथ पर कुल 746 वोटर हैं। राजेंद्र नगर के इस बूथ पर इन 746 वोटर्स में राघव चड्ढा का नाम नहीं है।
अनुराग ढांडा ने कहा कि इसके बाद अगर राघव चड्ढा को दिल्ली के अंदर अपना वोट बनवाना हो तो उसके कुछ ही सीमित तरीके हैं। पहला, वह पंजाब से अपना वोट यहां ट्रांसफर कराएं, लेकिन वह तो हुआ नहीं क्योंकि वहां के ड्राफ्ट रोल में उनका वोट कट गया था। इसके लिए पहले उनको वहां अपना नाम जुड़वाना पड़ेगा और फिर ट्रांसफर कराना पड़ेगा, इसलिए वोट तो ट्रांसफर हुआ ही नहीं। दूसरा, वह पहले से ही दिल्ली के वोटर रहे हों, लेकिन राघव चड्ढा ने खुद कहा कि वह पंजाब मोहाली के वोटर हैं और वह वहीं पर एसआईआर में अपना नाम ठीक करवाएंगे, सबूत देकर अपना नाम वहीं जुड़वाएंगे। इसका सीधा मतलब है कि वह दिल्ली के वोटर तो थे ही नहीं।
अनुराग ढांडा ने कहा कि दिल्ली के एसआईआर ड्राफ्ट रोल में भी राजेंद्र नगर के बूथ पर 746 लोगों के ही नाम हैं और उसमें राघव चड्ढा का नाम नहीं है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जो सूचना हमारे पास है और जिसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी चेक किया जा सकता है, अगर आज के दिन चेक किया जाए तो राजेंद्र नगर में उसी बूथ के ऊपर अब 747 वोट हो गए हैं। ड्राफ्ट रोल के अंदर बैक डेट से यह बदलाव हो गया। ड्राफ्ट रोल बैक डेट से कैसे बदल सकता है? जब 31 अगस्त को चुनाव आयोग ने यह कहा था कि इस बूथ पर 746 वोट हैं, बाकियों पर ऑब्जेक्शन लगा दिया गया है या काट दिया गया है, जिसकी लिस्ट चुनाव आयोग ने अलग से दे दी थी। इसके बाद अगर किसी को आपत्ति है तो वह डॉक्यूमेंट देगा या फॉर्म 6 भरकर नया वोट बनवाएगा। या फिर फॉर्म 6 भरा गया हो और नया वोट बनवा लिया गया हो, लेकिन 3 सितंबर तक तो ऐसा बनवाया नहीं गया होगा क्योंकि 3 सितंबर तक तो राघव चड्ढा पंजाब में दावा कर रहे थे।
अनुराग ढांडा ने बताया कि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर फॉर्म 9 पड़े हैं, जिन्हें कोई भी खुद जाकर देख सकता है। फॉर्म 9 का मतलब होता है कि आज की डेट में जितने भी नए फॉर्म 6 भरे गए हैं, उनकी एक समरी होती है। शाम को चुनाव आयोग यह जारी कर देता है कि आज ये नए वोट अप्लाई हुए हैं और किसी को कोई आपत्ति है तो वह कर सकता है। 3 सितंबर से लेकर आज तक के किसी भी फॉर्म 9 में राघव चड्ढा का नाम नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि उन्होंने कोई नया नाम नहीं जुड़वाया है।
अनुराग ढांडा ने कहा कि चुनाव आयोग की किसी भी प्रक्रिया का पालन करके दिल्ली के ड्राफ्ट रोल में 31 अगस्त की तारीख में राघव चड्ढा का नाम किसी भी तरह से नहीं जुड़ सकता है। यह संभव ही नहीं है, क्योंकि 3 सितंबर तक तो वह खुद यह कह रहे थे कि वह पंजाब के वोटर हैं, वहीं अपना वोट बनवाएंगे और वहीं क्लेम करेंगे। जबकि 31 अगस्त को दिल्ली का ड्राफ्ट रोल आ चुका था जिसके अंदर उनका नाम नहीं था।
अनुराग ढांडा ने कहा कि अगर बैक एंड से किसी व्यक्ति का नाम बिना किसी प्रक्रिया का पालन किए चुनाव आयोग की लिस्ट में जुड़ सकता है, तो फिर तो यह पूरी तरह से मनमर्जी है। फिर इसमें कोई प्रोसीजर, कोई नियम और कोई प्रक्रिया नहीं बची है। फिर न तो कोई फॉर्म भरने की जरूरत है और न ही कोई फॉर्म हटाने की जरूरत है। जिसका नाम चाहे चुनाव आयोग बैक एंड से डाल सकता है और जिसका नाम चाहे चुनाव आयोग बैक एंड से हटा सकता है। यह बात स्पष्ट तौर पर यह बताती है कि एसआईआर की यह पूरी प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है। इसमें भाजपा चुनाव आयोग का खुला इस्तेमाल करके मनमर्जी से, बिना किसी प्रक्रिया का पालन किए, जिसके चाहे वोट कटवा सकती है और जिसके चाहे वोट जुड़वा सकती है।
अनुराग ढांडा ने आम आदमी पार्टी की तरफ से मांग की कि चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए। दिल्ली चुनाव आयोग इस बात को स्पष्ट करे क्योंकि देश के लोग उन्हें देख रहे हैं। लोग देख रहे हैं कि लोकतंत्र में एसआईआर के नाम पर कैसे खुली लूट मचाई जा रही है। इसलिए चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब 31 अगस्त के ड्राफ्ट रोल में राघव चड्ढा का नाम नहीं था, तो अब वेबसाइट सर्च करने में 747वें सीरियल नंबर पर उनका नाम कैसे आ गया? ड्राफ्ट रोल की समरी में कुल 746 वोट लिखे हुए हैं। एक बार जब 746 की लिस्ट आ गई, तो उसके बाद 747वें नंबर पर राघव चड्ढा का नाम कैसे आया? वह किस प्रक्रिया के तहत आया और इसके लिए फॉर्म 6 कब भरा गया?
अनुराग ढांडा ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या पंजाब से वोट ट्रांसफर किया गया है? अगर पंजाब से वोट ट्रांसफर होता है, तो एपिक नंबर चेंज नहीं होता और वोटर आईडी वही रहती है। तो क्या राघव चड्ढा का एपिक नंबर पंजाब के वोटर आईडी से अलग है? यह सारी बातें चुनाव आयोग को साफ तौर पर दिल्ली और देश के लोगों के सामने रखनी चाहिए क्योंकि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में इससे बड़ा घालमेल और इससे बड़ी चोरी कोई और हो ही नहीं सकती।
अनुराग ढांडा ने कहा कि अगर बिना किसी प्रक्रिया और बिना किसी डॉक्यूमेंटेशन का पालन किए हुए चुनाव आयोग सीधे बैक एंड से एसआईआर में किसी भी व्यक्ति का नाम जोड़ सकता है और किसी का भी नाम हटा सकता है, तो यह लोकतंत्र की खुली लूट है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अगर प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है, तो राघव चड्ढा का जो वोट गलत तरीके से लिस्ट के अंदर जोड़ा गया है, उसे यहां की लिस्ट से भी हटाया जाना चाहिए और चुनाव आयोग की पूरी प्रक्रिया का सख्ती से पालन होना चाहिए।
📲 राष्ट्रीय, पंजाब और राजनीति की ताज़ा और प्रमाणिक खबरें सबसे पहले सीधे आपके WhatsApp पर पाएं।
💬 WhatsApp ग्रुप जॉइन करें

