- पंजाब सरकार बुखार, डेंगू, मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों के इलाज का पूरा खर्च उठा रही है; मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मुफ्त उपचार उपलब्ध
- ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ ने अस्पताल के बिल की चिंता से मुक्त कर मेरे इलाज में बड़ी मदद की: लाभार्थी बलविंदर कौर
- पात्र परिवार मानसून के दौरान मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत समय पर कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकते हैं: डॉ. बलबीर सिंह
- पहले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण; मानसून में बुखार होने पर समय पर जांच गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचा सकती है: डॉ. राज कुमार, एम.डी. मेडिसिन
चंडीगढ़, 11 जुलाई 2026
मानसून की पहली बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं यह स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से भरे मौसम की शुरुआत भी होती है। हर वर्ष पूरे भारत में डेंगू, मलेरिया और बुखार से जुड़ी अन्य बीमारियों के मामलों में वृद्धि दर्ज की जाती है। इस वर्ष भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है।
अमृतसर की 32 वर्षीय लाभार्थी बलविंदर कौर ने बताया, “मैंने हाल ही में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 8,400 रुपये का कैशलेस इलाज कराया है।”
उन्होंने बताया कि तेज बुखार होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां अस्पताल के कर्मचारियों ने उनका मुख्यमंत्री सेहत योजना में पंजीकरण कराया। उन्होंने कहा, “मैं सिलाई का काम करके अपना परिवार चलाती हूं। इस योजना ने समय पर इलाज और आर्थिक सहायता देकर मेरा बोझ कम किया, जिससे मैं अपनी सेहत पर ध्यान दे सकी। मैं मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा शुरू की गई इस योजना की आभारी हूं, क्योंकि यह जरूरत के समय परिवारों का सच्चा सहारा बनती है।”
वर्ष 2025 में किए गए एक भारतीय अस्पताल अध्ययन में पाया गया कि मानसून के दौरान भर्ती मरीजों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस (तीव्र बुखार संबंधी बीमारी) का सबसे सामान्य कारण डेंगू था। यह अध्ययन इस बात पर बल देता है कि समय पर जांच और तत्काल उपचार अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि मानसून से जुड़ी अनेक बीमारियों के शुरुआती लक्षण एक जैसे होते हैं।
डॉक्टर लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे लगातार बने रहने वाले बुखार को नजरअंदाज न करें। वहीं, पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना पात्र परिवारों को अस्पताल के खर्च की चिंता किए बिना कैशलेस इलाज उपलब्ध करा रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने मच्छरों और जलजनित मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए निगरानी व्यवस्था, अस्पतालों की तैयारियों तथा जांच सुविधाओं को और मजबूत किया है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास पानी जमा न होने देने तथा बुखार के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
उन्होंने कहा, “जलजनित बीमारियों की रोकथाम घर से ही शुरू होती है। मच्छरों के प्रजनन को रोकने में प्रत्येक परिवार, स्कूल और समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही हम लोगों को यह भी बताना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के पात्र लाभार्थी बिना किसी आर्थिक चिंता के समय पर इलाज करा सकते हैं।”
सीनियर मेडिकल अधिकारी एवं एम.डी. मेडिसिन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, वेरका (पंजाब) के डॉ. राज कुमार ने कहा कि मरीज अक्सर हर बुखार को सामान्य वायरल संक्रमण समझने की गलती कर बैठते हैं।
उन्होंने कहा, “हर मानसून में हमारे पास ऐसे मरीज आते हैं जो तीन-चार दिन तक घर पर स्वयं इलाज करते रहते हैं। तब तक उनमें डिहाइड्रेशन या डेंगू के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगते हैं। एक साधारण रक्त जांच और समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। पहले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि मानसून में केवल डेंगू ही समस्या नहीं है। “इस मौसम में मलेरिया, टाइफाइड, वायरल हेपेटाइटिस और एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मामले भी आम हैं। चूंकि इनके शुरुआती लक्षण एक जैसे होते हैं, इसलिए लोगों को स्वयं दवा लेने से बचना चाहिए और लगातार बुखार रहने पर चिकित्सक से अवश्य संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच ही मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।”
डॉ. राज कुमार ने बताया कि शुरुआती अवस्था में इस प्रकार के बुखार का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में भी मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत सुरक्षित और प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार से जटिलताएं कम होती हैं तथा बड़े अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता भी घट जाती है।
स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) द्वारा साझा किए गए मुख्यमंत्री सेहत योजना के ताजा आंकड़े भी मौसमी रुझानों की पुष्टि करते हैं। 6 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, एक्यूट फेब्राइल इलनेस इस योजना के तहत उपचारित होने वाली सबसे सामान्य बीमारियों में शामिल रही।
मरीजों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, उपमंडलीय अस्पतालों, जिला अस्पतालों तथा सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में किया गया। मरीज की स्थिति के अनुसार बुखार संबंधी बीमारियों के उपचार पैकेज 2,100 रुपये से लेकर 8,400 रुपये तक उपलब्ध हैं।
मलेरिया, एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस, तेज बुखार और वायरल हेपेटाइटिस के मामलों का भी उपचार किया गया, जिससे स्पष्ट है कि मानसून जनित बीमारियों का मौसम शुरू हो चुका है।
बुखार संबंधी दावों के सर्वाधिक मामले फाजिल्का, मोगा, संगरूर, गुरदासपुर और होशियारपुर जिलों से सामने आए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि लोग बड़े शहरों में जाए बिना अपने नजदीकी अस्पतालों में ही उपचार प्राप्त कर रहे हैं।
इन आंकड़ों से योजना की व्यापक पहुंच भी स्पष्ट होती है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने मौसमी बुखार का इलाज कराया, वहीं मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उसी दिन डायलिसिस, हृदय संबंधी उपचार, इंटेंसिव केयर तथा अन्य महंगे उपचारों का भी खर्च वहन किया गया। कुछ हजार रुपये वाले बुखार उपचार पैकेजों से लेकर जीवनरक्षक हृदय सेवाओं तक, यह योजना सामान्य बीमारियों से लेकर आपातकालीन परिस्थितियों तक परिवारों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभर रही है।
डॉ. राज कुमार ने सलाह दी कि यदि बुखार दो दिन से अधिक बना रहे, विशेषकर उसके साथ तेज शरीर दर्द, लगातार उल्टियां, पेट दर्द, रक्तस्राव, सांस लेने में तकलीफ या अचानक अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो उसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें।
उन्होंने कूलरों, गमलों और अन्य स्थानों पर जमा पानी नियमित रूप से खाली करने, मच्छररोधी उत्पादों का उपयोग करने, पूरी बांह के कपड़े पहनने तथा मानसून के दौरान विशेष स्वच्छता बनाए रखने की भी सलाह दी।
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