ओस्लो में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उठा विवाद
19 May 2026
Narendra Modi के यूरोप दौरे के दौरान Norway में एक प्रेस कार्यक्रम के बाद मीडिया की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। नॉर्वे की पत्रकार Helle Ling ने प्रधानमंत्री से प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल पूछने की कोशिश की, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग तक बहस छिड़ गई।
प्रधानमंत्री मोदी इस समय पांच देशों के विदेश दौरे पर हैं। नॉर्वे उनकी यात्रा का चौथा पड़ाव था। इससे पहले वह United Arab Emirates, Netherlands और Sweden का दौरा कर चुके हैं। इसके बाद उन्हें Italy जाना है।
संयुक्त बयान के बाद पत्रकार का सवाल
ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री Jonas Gahr Støre ने साझा बयान जारी किया। हालांकि इस दौरान मीडिया के सवाल नहीं लिए गए। इसी बीच पत्रकार हेला लेंग ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री दुनिया की “सबसे स्वतंत्र प्रेस” के सवालों का जवाब क्यों नहीं लेते।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हेला लेंग की आवाज सुनाई देती है, जिसमें वह कहती हैं, “प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों को क्यों नहीं लेते?” बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि नॉर्वे प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में पहले स्थान पर है, जबकि भारत काफी नीचे है। उन्होंने कहा कि सरकारों से सवाल पूछना पत्रकारिता का मूल कर्तव्य है।
विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में फिर उठे सवाल
इस विवाद के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भी वही पत्रकार मौजूद रहीं। उन्होंने विदेश मंत्रालय के पश्चिमी मामलों के सचिव Sibi George से भारत में मानवाधिकार, प्रेस की स्वतंत्रता और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मीडिया के सवाल न लेने को लेकर कई तीखे सवाल पूछे।
पत्रकार ने पूछा कि दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे और क्या भारत में मानवाधिकार उल्लंघन बंद होंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी भारतीय मीडिया के कठिन सवालों का जवाब देना शुरू करेंगे।
“भारत सिर्फ एक देश नहीं, 5000 साल पुरानी सभ्यता” — सिबी जॉर्ज
सवालों का जवाब देते हुए सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं बल्कि “पांच हजार साल पुरानी निरंतर सभ्यता” है। उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान और मौलिक अधिकारों के साथ दुनिया में मजबूती से खड़ा है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भारत ने दुनिया के कई देशों की मदद की और यही भरोसा भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करता है।
सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अधिकार देता है और महिलाओं को बराबरी का अधिकार देश की आजादी के साथ ही मिल गया था। उन्होंने कहा, “हमें अपने लोकतंत्र पर गर्व है।”
बहस के दौरान तीखा माहौल
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब पत्रकार लगातार बीच में सवाल पूछती रहीं तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। सिबी जॉर्ज ने कहा, “कृपया मुझे बीच में मत टोकिए। आपने सवाल पूछा है, मुझे जवाब देने दीजिए।”
उन्होंने कहा कि जवाब किस तरह दिया जाएगा, यह तय करने का अधिकार जवाब देने वाले का होता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग कुछ गैर-सरकारी संगठनों की रिपोर्ट पढ़कर भारत पर टिप्पणी करते हैं, लेकिन उन्हें भारत के पैमाने और विविधता की पूरी समझ नहीं होती।
भारतीय मीडिया के आकार का दिया उदाहरण
सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत की मीडिया व्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी मीडिया व्यवस्थाओं में से एक है। उन्होंने बताया that दिल्ली में ही सैकड़ों समाचार चैनल अलग-अलग भाषाओं में लगातार प्रसारण करते हैं। उनके मुताबिक भारत जैसे विशाल लोकतंत्र को कुछ सीमित रिपोर्टों के आधार पर नहीं समझा जा सकता।
पत्रकार ने दी सफाई
बाद में हेला लेंग ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा कि वह किसी विदेशी सरकार की एजेंट या जासूस नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल एक पत्रकार के तौर पर अपना काम किया और सरकारों से सवाल पूछना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने लिखा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उन्हें अपने पेशेवर सवालों के लिए इस तरह सफाई देनी पड़ेगी।
प्रेस स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर नई बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत में प्रेस की स्वतंत्रता, मीडिया की भूमिका और राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ पत्रकारों के सवाल पूछने के अधिकार की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत के लोकतंत्र, संविधान और मीडिया की व्यापकता का जोरदार बचाव किया है।
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