नई दिल्ली: भारत में रोजगार परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है, जहां निजी क्षेत्र की प्रमुख आईटी कंपनियां जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और इंफोसिस ने कर्मचारियों की संख्या के मामले में पारंपरिक सरकारी नियोक्ताओं जैसे भारतीय रेलवे और भारतीय सशस्त्र बलों को पीछे छोड़ दिया है।
TCS वर्तमान में लगभग 6,07,354 कर्मचारियों के साथ देश की सबसे बड़ी निजी नियोक्ता कंपनी बन गई है। दूसरी ओर, इंफोसिस के पास लगभग 3,23,379 कर्मचारी हैं। इसके विपरीत, भारतीय रेलवे में 12.52 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि भारतीय सशस्त्र बलों में कुल 14.2 लाख कर्मी हैं।
यह प्रवृत्ति केवल आईटी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। निजी बैंकों और अन्य निजी संस्थानों ने भी बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान किया है, जिससे वे देश के प्रमुख नियोक्ताओं में शामिल हो गए हैं। उदाहरण के लिए, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में 3.89 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि इंफोसिस में 3.43 लाख लोग काम करते हैं।
हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाल के वर्षों में सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की संख्या में कमी देखी गई है। 1990-91 में, भारतीय रेलवे में 16.5 लाख नियमित कर्मचारी थे, जो 2022-23 तक घटकर 11.9 लाख रह गए। हालांकि, 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 12.5 लाख हो गई, लेकिन 1990-91 के मुकाबले अब भी 4 लाख कम है।
बैंकिंग क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है। 1991-92 में, सरकारी बैंकों में 8,47,412 कर्मचारी थे, जबकि निजी बैंकों में केवल 63,398। 2023-24 तक, सरकारी बैंकों में कर्मचारियों की संख्या घटकर 7,46,679 रह गई, जबकि निजी बैंकों में यह संख्या बढ़कर 8,74,049 हो गई, जो सरकारी बैंकों से अधिक है।
इस बदलाव का मुख्य कारण निजी क्षेत्र में तेजी से हो रहा विस्तार और डिजिटलाइजेशन है, जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में योगदान दे रहा है। इसके विपरीत, सरकारी संस्थानों में स्वचालन और अन्य कारकों के कारण रोजगार वृद्धि की गति धीमी रही है।
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